क्भी खुद से मिलना चाहता हूँ मैं !
Updated: Dec 6, 2022
By Karan Handa
क्भी खुद से मिलना चाहता हूँ मैं !
सदियों से भाग रहा हूँ अपने आप से दूर
बेरहम इस भटकन से आराम चाहता हूँ मै
क्भी खुद से मिलना चाहता हूँ मैं !
सीने से सिमट जाऊँ अपने ,
ज़ख्म ज़हन के सहलाऊ अपने,
आँखों से मेरी आंखे मिलाकर,
रंग मेरी रूह का देखना चाहता हूँ मैं,
क्भी खुद से मिलना चाहता हूँ मैं !
अगर समझे तो बेवफा भी है हम
कि इश्क ज़िन्दगी से करके
इंतज़ार हर पल मौत का किया है हमने
यूँ तो ग़म नही ज़िन्दगी में कोई
फिर क्यों अँधेरे में जीना चाहता हूँ मै,
क्भी खुद से मिलना चाहता हूँ मै!
By Karan Handa

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