“कोशिश-ए-क़ुर्बत”
Updated: Sep 20, 2022
By Gaurav Kumar
मुझे फिर से सीखना होगा
कैसे तुमपर कविता लिखूँ
कैम्लिन की वो गुलाबी फूलों वाली
सुफ़ेद पेंसिल से।
मुझे फिर से सीखना होगा
कैसे मैं रज़ाई के नीचे टॉर्च जलाकर
चार्ट पेपर पर
सिर्फ़ तुम्हारे लिये
शब्द रचूँ।
बड़ा कठिन होगा अब ये
वो पेंसिल भी है
चार्ट पेपर भी
रज़ाई और फ़ोन की लाइट भी
ये सब अब मुश्किल नहीं
पर तब और अब के बीच इतने साल गुज़र गये
तुम्हारे और मेरे बीच
इतना कुछ बदल गया।
हाँ तुम कोशिश कर रही हो
मैं भी
पर अब दम घुटता है मेरा
इस कोशिश-ए-क़ुर्बत में।
By Gaurav Kumar

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