कोशिश
Updated: Jan 13, 2023
By Romal Bhansali
मैं लेता रहा तेरा नाम सदा,
क्यों पड़ी मुझे ज़रूरत तेरी |
मैं करता रहा तेरी इबादत,
जाने कौन लगती है तू मेरी |
क्या हासिल करना था मुझे इस जहां में,
मेरे आस पास मंडराता रहा साया तेरा |
सफ़ेद चादर में लिपटा हुआ ही जाना है,
क्यों मुक़द्दर बना दिया तुझे मेरा |
सोचता हूँ छोड़ दूँ तुझे,
क्या काम आयी है तू मेरे |
फिर खुदको आईने में जब देखा,
सब भूलके बिछा दिया खुदको कदमो में तेरे |
By Romal Bhansali

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