कोरोना
By Rashmi Mahish
हाय रे कोरोना,
तेरी वजह से पढ़ गया सारी दुनियाँ को रोना
कब तक मचाएगा तू अपनी कहर
देख ना सुने पढ गए गलियां और शहर।
गैरो को छोड,
तुने तो अपनों से ही दूर किया
बंद कमरो में,
अकेले तड़पने पर मजबूर किया
बंद कर अब तू फैलाना अपना कहर
देख ना सुने पढ गए गलियां और शहर।
छीन गया बच्चों से, उनकी बच्चन की यादे
खेलना कूदना और मस्ती भरी बाते
अब बस कर कोरोना तू फैलाना अपना कहर
देख ना सुने पढ गए गलियां और शहर।
कितनो कि तू ने रोजी रोटी छिनी
कितनो को तू ने भुखा सुलाया
छीन लिया हमसे बड़े बुजुर्गो का साया
अब बस बहुत हुआ तेरा कहर
अब न सुनी होगी गलियां और शहर।
क्योकी नई सुबह के साथ
एक उम्मीद सबको नज़र आया
जब तारे के रूप में कोरोना टीका हमने पाया
देख कोरोना अब खतम होने को आया तेरा कहर
अब फिर ना सुनी होगी गलियां और शहर।
बस करना चाहूंगी इतना ही अपील
हाँथ धोना, मास्क पहनना और रखना कुछ दिन दो गज़ की दुरी
अगर हराना है कोरोना को तो
ये करना है जरुरी
क्योकी मिटाना है अब कोरोना का कहर
फ़िर ना सुनी होगी गलियां और शहर।
लगवाओ सब कोरोना का दोनों टीका
तभी तो होगा कोरोना का कहर फिका
कोरोना ने मचा ली खूब तबाही दुनियाँ में सारी
मुँह तोड़ जवाब देने का अब हमारी है बारी
फिर ना रहेगा कोरोना का कहर
और ना सुनी होगी गलियां और शहर।
By Rashmi Mahish

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