कोरा कागज़
By Ami Mehta
आज मेने कलम तो उठा ली
पर समज मे नहीं आ रहा की क्या लिखू?
शब्द तो बोहोत है मेरे पास, पर सबसे पेहले
किसका उपयोग करू?
यह कागज़ भी आज मुजसे बेहेस कर रहा है की
मे इतना कोरा क्यू दिखू?
मन तो बोहोत है की इन शब्दो के साथ कागज़
पर ज़ोर ज़ोर से चिखु
क्या करू, आज मेने कलम तो उठा ली पर समज मे
नहीं आ रहा की क्या लिखू?
मन का ये जो गोदाम है, उसका एक कागज़ मे
कैसे समावेश करू?
उसके लिए तो एक किताब भी कम है
अब यह बात, इस कागज़ को कैसे समजाऊ?
आज तो ये कलम भी दुविधा मे पड़ गई, की इसका
साथ मे कैसे निभाऊ?
क्या करू, आज मेने कलम तो उठा ली पर समज मे
नहीं आ रहा की क्या लिखू?
By Ami Mehta

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