कोई है अंदर
By Shovit Raj
हर रोज़ कोई है मेर अंदर ,
जो मुझसे कहता है की
अब थक चुकके हो तुम !!
हर रोज़ कोई है मेरे भीतर ,
जो मुझसे कहता है की अब
मार चुके हो तुम!!
हर रोज़ एक ख़्वाब है मुझमें ,
जो ये याद दिलाती है की उसे
अधूरा छोड़ चुके हो तुम !!
हर रोज़ एक आवाज़ है मुझमें ,
जो ये विश्वाश दिलाती है की ,
एक आग है तुम्हारे अंदर जिससे
ज़िंदा हो चुके हो तुम!!
By Shovit Raj

Comments