कोई सीता अब ना टूटेगी
Updated: Sep 20, 2022
By Uday Divakar Pandey
ये रीत जगत की छूटेगी
कोई सीता अब ना टूटेगी
जब कोई रावण आएगा
छूने को हाथ बढ़ाएगा
खुद सीता भुज को काटेगी
लंका में टुकड़े बांटेगी
अश्रु नहीं अंगार बहेगा
वो सीता का क्या वार सहेगा
होगी ना कोई अग्नि परीक्षा
होगी तो अब रण कौशल दीक्षा
सफल ना होगी कूटनीति अब
रावण तू कर ले कोई समीक्षा
मेरी आज की सीता है सबला
तू समझा जिसे कभी अबला
भूल न कर तू पुनः हरण की
विशिख चलेंगे जैसे कर्ण की
दया की भिक्षा को दौड़ेगा
देखेगा विध्वंश जो रण की
अभी समय है सम्हल ज़रा
कर अपने वंश को हरा भरा
वैदेही को जो छेड़ेगा
काली का कोप तू झेलेगा
कर याद वो क्षण तू आया था
शादी प्रस्ताव जो लाया था
कोशिश तूने स्पर्श कि की जब
तिनका भी छू ना पाया था
क्यों व्यर्थ ही करता है प्रयास
मुंह की खाएगा अनायास
जा जाकर उनसे विनती कर
या शेष समय की गिनती कर
भारत की सीता जाग उठी
लड़ने का प्रण वो ठान चुकी
भानु नवीन उदय होगा
अब रावण वध निश्चय होगा
टूटेगा दंभ उस दानव का
होगा उद्धार अब मानव का
चहुं ओर धर्म शासन होगा
चहुं ओर सत्य आसन होगा
जनकतनया जिधर चलें
हर पापी मरणासन होगा
कोई कार्य कहीं अब शेष नहीं
किसी अधम का है अवशेष नहीं
रामप्रिया वंदन को छोड़
अब कोई काम विशेष नहीं
गर जान बचानी है तुमको
आदर से नमन करो उनको
वो जनकनंदिनी प्रीता हैं
वसुधा की प्रिय वो सीता हैं
सब दुख हर निर्मल जीवन दें
वो रामायण वो गीता हैं
अंतिम सलाह संदेश समझ
स्त्री को ना तू भोग समझ
वो मां हैं उनकी पूजा कर
कोई कर्म गलत ना दूजा कर
संदेश यही है तुझे अभी
रण में ना हो फिर भेंट कभी
By Uday Divakar Pandey

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