कोई तो हो ऐसा
By Vishesh Khandelwal
कोई तो हो ऐसा, जो एक बार समझे मेरे मन में क्या है मेरी सोच, मेरी ताक़त, मेरे जज़्बात क्या है जो एक बार आकर मुझसे कह दे तेरे दर्द तेरी आँखों से बयां है
कोई तो हो ऐसा, जो अपनी सोच के ऊपर मेरे शब्दों को चुन ना चाहे अपनी बातों से ज्यादा, मेरे मन की सुन ना चाहे अपनी चाह के आलावा मेरी इच्छाओं को जान ना चाहे मेरे कहे बोल मन से मान ना चाहे
कोई तो हो ऐसा, जो इन टूटे जज़्बातों को जोड़ सके जागते हुए निकाली उन रातों को मोड़ सके मेरे दिल में दर्द बहुत है मेरे दिल के सारे दर्द, सारी तकलीफ़ों को तोड़ सके
कोई तो हो ऐसा, जो समझे रिश्तों की डोर को सही रिश्ते नहीं निभ जाते है, सिर्फ मिलने से कहीं रिश्ते तो दिल की गेहराहियों में बस्ते हैं और रिश्ते दिल से निभाए जाते हैं, दिखावे से नहीं
कोई तो हो ऐसा, जो समझे जीवन ख़ुशी देने में है घर की बहु को बेटी मान लेने में है मंदिर जाकर घंटी बजाने में नहीं भगवान् की इबादत भूखे को खिलाने में है
कोई तो हो ऐसा, जो मेरे उठाए हर कदम पे भरोसा कर सके मेरे पिलाये हर पानी की बूँद की प्रशंसा कर सके मेरे दिए हर दान को एक पर्व मान सके और मेरे गिराए हर खून की बूँद को गर्व मान सके
कोई तो हो ऐसा, जो मुझे अपनी नहीं मेरी नज़रों से देखे जिसके साथ हर दर्द बाँट सकूँ, जिसको हर गलती पर डाँट सकूँ जिसके साथ खुल के जी जाऊँ, हर ग़म का घूँट ख़ुशी से पी जाऊँ कोई तो हो ऐसा, कोई तो हो ऐसा
By Vishesh Khandelwal

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