कोई और गीत पिरोया जाए।
Updated: Sep 3, 2025
By Surya Kant Pawar
कब तक रोयेंगे अपने ग़मों को हम।
कोई और धुन रखो, कोई और गीत पिरोया जाए।
किनारे नाशाद हैं दुनिया में बहुत।
एक और जाम रखो, दरिया कहीं और बहाया जाए।
यज़्दाँ यूँ ही लुकता -छुपता रहेगा, आशिक है हमारा।
तुम गर कहो , उसे ज़मीं पर उतारा जाए|
बाक़ायदा साथ दिया उसने, दो कदम पीछे था बस।
तुम अपनी सुनाओ,तुम्हारे लिए कहाँ जमीन बिछाया जाए?
By Surya Kant Pawar

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