कोई अपना सा लगे …
By Anurag Saxena
कोई अपना सा लगे कोई बेगाना,
कहीं सराय है कहीं आशियाना।।
***हर मुसाफिर है यहां,
चलते जाना है
न रौको तो सराय है
रोको तो आशियाना।।
***हर तरफ रंजिशें बिखरी हैं
दुनिया में
दो मीठे बोल का
मोहताज़ है जमाना।।
कहीं सराय है कहीं आशियाना।।
***दुनिया के भंवर में मासूम
सा इंसा है
सराय सी जिंदगी को समझे
आशियाना।।
By Anurag Saxena

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