कैसे कहें कि मेरे क्या हो तुम...
By Sarvjeet Singh
कैसे कहें कि मेरे क्या हो तुम...
मेरी सुबह भी तुम
मेरी शाम भी तुम,
मेरी धड़कन में तुम
मेरी सांसों मे तुम,
मेरी खुशी भी तुम
मेरा गम भी तुम,
मेरा सवाल भी तुम
मेरा जवाब भी तुम,
मेरे ख्यालों में तुम
मेरी यादों में तुम,
मेरा ख्वाब भी तुम
मेरी हकीकत भी तुम,
मेरी तड़प भी तुम
मेरा करार भी तुम,
मेरे जीने की वजह तुम
मेरे जीने का मकसद तुम,
मेरा इश्क भी तुम
मेरा प्यार भी तुम,
मेरी हर दुआ मे तुम
मेरी हर फरियाद भी तुम,
मेरी चाहत भी तुम
मेरी हर ख्वाहिश भी तुम,
मेरे खुदा भी तुम
मेरी इबादत भी तुम..
और इन हाथों की लकीरों
का खेल तो देखो...
बस.....
मेरी किस्मत में ही नहीं तुम..
By Sarvjeet Singh

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