कैफियत
By Komal Paradkar
कैफियत है तुझसे..कुछ शिकायते है..
शिकवा तुझसे नही ..तेरे प्यार से है..
वैसे तो हमारे आशिक हजारो है..
दिल धडकता पर बस आपकी आहटोंसे है..
झलक प्यार की जताकर युं परिंदा होना..
मंजूर नही हमें आपका इस तरह दुर रहना..
खता जो कि है आपने हमारे दिल को छुने की..
इसी दिल में आपको जिंदगीभर कैद करेंगे..
है कसम हमे आपके प्यार की..
सपनो मे आकर हमारी नींद जो आपने उडादी..
माफ कैसे करेंगे.. ये मदिरा ए इश्क आपहीने तो पिलाई
अब ये नशा आंखो से जो होठो तक आया है..
सजा तो आपको सहनी होगी..कसूर ही इतना गहरा है...
ये इश्क का जाम अब पुरी जिंदगीभर रहेगा..
दिल ये नादान ना अब किसिकी सुनेगा..
आप की गुस्ताखी अब ऐसे रंग लायेगी..
हमारे नजरो मे रहनेकी सजा आपको..
सिर्फ ये जन्म ही नही .. हर जन्म सहनी होगी..
By Komal Paradkar

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