कैद किसी की
By Pallavi Jawalkar
कैद किसी की, किसी की आजादी बन गई
मायूसी किसी की, किसी की रौनक बन गई
जो खता कभी की थी किसी पर, वो सजा आज खुद की बन गई
और सजा भी ऐसी कि, अपनों के करीब आने की वजह बन गई
बरसों से दबी हुई थी जो, पंछियों की वो आवाज़ सुनाई दे रही है
प्रकृति खुद ही फिर से अपना मनमोहक रूप ले रही है
आज स्वार्थ ही, निस्वार्थ हो गया
बस अपना ख्याल रखना ही सबका ख्याल रखना हो गया
घरों में अपने रहना है उनके लिए, जिनके पास घर नहीं है
खुद की जान बचाने के लिए, इसके सिवा दूजा रास्ता नहीं है
चाहत थी छुट्टीयों की कभी, वही मजबूरी बन गई
कैद किसी की, किसी की आजादी बन गई
By Pallavi Jawalkar

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