कृपा का बोध
Updated: Jun 1, 2023
By Manish Agrawal
हे ईश्वर तेरी कृपा का, जब से हुआ है मुझको बोध ।
मेरे जीवन में जितने थे, मिट गए सारे गतिरोध।।
समाप्त हो गए सारे संशय, जब से हुआ हूं शरणागत ।
तेरा दिया सभी स्वीकार, बन गया हूं तेरा भक्त ।।
जीवन के ये उतार–चढ़ाव, अब नहीं करते मुझे परेशान ।
जिधर देखूं उधर है तू, सर्वत्र है तेरा निशान ।।
संपूर्ण शांति छाई है, नहीं होता कभी भयभीत ।
अब तो तेरी शरण में मेरा, हर पल रहा है बीत ।।
मेरे जीवन का मैंने, सौंप दिया तुझको दायित्व ।
मेरा ‘मैं’ अब मिट गया, नहीं रहा उसका अस्तित्व ।।
अगर कुछ मांगा तुझसे मैंने, तो ये है मेरा अभिमान ।
मेरे भले बुरे की मुझमें, क्या तुझसे ज्यादा पहचान ।।
डरता हूं फिर न भटक जाऊं, तेरी माया है इतनी प्रबल ।
विश्वास पुनः जग जाता है, मुझको तो है तेरा संबल ।।
हे प्रभु! कृपा करो ढहा दो, मोहबंधन के सभी प्राचीर ।
ओर न कुछ चाहूं मैं, बस तेरे दर्शन को रहूं अधीर ।।
बस इतनी ही है प्रार्थना, हमेशा रखना मुझे निकट ।
भक्ति पथ से भटकूं नहीं, समस्या आए कितनी विकट ||
By Manish Agrawal

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