कुछ सवाल...
Updated: Jan 11, 2023
By Dutika Mahanta
आँसू जो आँखों का श्रृंगार है
क्या पता कभी वो झूठा हो?
आँखें जो मन का दर्पण है
क्या पता उलझन में उलझा हो?
जज़बात जैसे हृदय में ही दबा है
क्या कहे जब चुप्पी को गले लगाया हो?
हृदय प्रेम का सागर है
पर क्या करे जब वो रूठा हो?
क्या करे, क्या न करे ये समझ मैंने खो दिया।
सवालों का पहाड़ मन में यूँ उमड़ आया!
विश्वास भावनाओं से छूट सा गया...
जब सच झूठ का फासला धुंधला सा गया!
मन की ज्वाला को जब बारिश न मिला
आक्रोश मैंने आँसूओं में पिघला दिया।
By Dutika Mahanta

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