कुछ बातें अनकही
Updated: Sep 16, 2025
By Yakshita Gawan
कुछ बाते अनकही
क्यों...
दुनिया है एक जैसी सारी मतलबी
यहां न कोई दोस्त और न कोई अपना
सब पता नही क्यों है इतना बेगाना
बोलते तो बाते ऐसी है जैसे
सारी उम्र साथ निभायेंगे
पर असलियत तो यही है की
कभी मरियत पर भी मिट्टी डालने नही आयेंगे
ये कैसा दुनियां का दस्तूर है
मरने से पहले इंसान को जीने नहीं देते
और मरने के बाद उसकी चीजों को
एक एक करके छीन है लेते
लोग कहते है की
यही दुनिया का दस्तूर है
पर इसमें उन लोगो का क्या कसूर है
जो अपनी अच्छाई के हाथों मजबूर है
ये बात तो सच है की
अच्छे लोगो को सारी दुनिया
भला बुरा सुनाकर चली जाती है
और उपर से ये भी है बोलते
की तुम्हे अच्छा बनना ही क्यों है ?
तो मेरा उनसे बस यही है कहना
अगर सारे लोग बुरे हो जाएंगे
तो इंसानियत और प्यार कहां जायेंगे
नहीं बन सकते कुछ अच्छे लोग बुरे
वो अपनी आत्मा के हाथो मजबूर है
उन्हे भी बुरा लगता है
जब लोग उनके जैसे नही होते
पर बात वहीं है ना ,
नही बना जाता ना वैसा
बस नही बना जाता.......
ऐसा नहीं है की थक गई हूं
मैं ये सब देखकर
पर यहां लोग अपनी खुशी से ज्यादा
दूसरो के दुख से खुश है
क्या यही इंसानियत है ?
सब पूछते है की तू क्यों इतनी चुप है
मेरा उनसे बस यही जवाब है
की तुम सब का सुनते सुनते
मेरा बोलने से ही मन भर गया
अभी तुम लोगो को ये सब समझ नही आयेगा
पर एक न एक दिन जरूर आएगा क्योंकि
इंसान को जिंदगी बस एक बार ही मिलती है
इसलिए आत्म सम्मान रखो, अहंकार नहीं
इस अहंकार में इतनी ताकत है ना
ये दोस्त को दुश्मन और
दुश्मन को दोस्त बना सकता है
ये अपनो को भड़का सकता है
और घर उजाड़ भी सकता है
कुछ लोग ऐसे भी बोलेंगे कि
क्या कभी तूने नही किया ऐसा
उनसे बस यही जवाब है मेरा की
नही मैने कभी नही किया ऐसा क्योंकि
मेरा मन इसकी इज्जाजत नही देता
कुछ लोग ये भी बोलेंगे कि
हम तो जैसे है वैसे ही रहेंगे
तू कौन है ज्ञान देने वाली ?
तो इन आख़िरी कुछ पंक्तियों में इसका जवाब है.....
ये जिंदगी कभी वापस नहीं आएगी
और जिस वक्त तुम अपने बुरे कामों से और
अपनी बुरी बातो से दूसरो का दिल दुखा रहे हो ना
इसका पछतावा तुम्हे इसी जिंदगी में होगा
और जब तुम्हे अपनी गलतियां समझ आएगी ना
तब तुम उन्हे ठीक नहीं कर पाओगे
क्योंकि जो बाते बोल दी वो वापस नही ले सकोगे
और जो गलती कर दी उसे ठीक नहीं कर सकोगे
तो आप सबसे प्रार्थना है मेरी की
अपनी बातो से न किसी का दिल दुखाओ
और न ही बुरे काम करो
By Yakshita Gawan

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