कुछ बाकी है...
By Dr. Shweta Singh
अब मन कहता है की रुक जाऊँ..
पर अभी तो चलना बाकी है...
कुछ अपने हैं..कुछ सपने हैं..
कुछ काम अधूरे बाकी है..
बाती थक नहीं सकती तब तक..
जब तक तेल का जलना बाकी है..
अब जान नहीं है लौ में..
पर अंधकार का थमना बाकी है..
आँखों में नींद बहुत है..
पर फिर भी जगना बाकी है..
अब दिल चाहता है की सो जाऊँ..
पर धूप का ढलना बाकी है...
By Dr. Shweta Singh

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