कुछ बाकी है
By Dr. Shruti Pandey
कुछ फर्क तो तब भी बाकी था,
कुछ फर्क अभी भी बाकी है
पर उस फर्क के बीच ऐ ज़िन्दगी,
हमने कुछ काली रातें काटी हैं |
हाँ प्यार तो तब भी काफी था,
हाँ प्यार अभी भी काफी है
पर उस प्यार के बीच शायद,
अब कुछ शर्तें हमने बांटी हैं |
कुछ लम्हे तब भी खास थे,
कुछ लम्हे अभी भी खास हैं
पर उन लम्हों के बीच शायद,
कुछ और बर्बादी बाकी है |
अल्फ़ाज़ कुछ तब भी बाकी थे,
अल्फ़ाज़ कुछ अब भी बाकी हैं
पर अल्फ़ाज़ों के बीच शायद,
अब खामोशी की एक आँधी है |
इक रिश्ता तब भी कायम था,
इक रिश्ता अभी भी कायम है
इस टूटे रिश्ते के बीच शायद,
इक डोर अभी भी बाकी है |
कुछ फर्क तो तब भी बाकी था,
कुछ फर्क अभी भी बाकी है
पर उस फर्क के बीच ऐ ज़िंदगी,
हमने कुछ काली रातें काटी हैं |
By Dr. Shruti Pandey

Comments