कुछ बाकी है
By Sasmita Kumari Pradhan
वह प्यार का समां,
डूबती सूरज का नगमा ,
सनसनाती हवा का झोंका ,
दिल के हर कोने में
आज भी इंतज़ार बाकी है ;
वह जुल्फों का सहलाना ,
शरवती आँखों को फ़साना ,
होठों पर इज़हार का तराना ,
धड़कनो के इस सैलाब में
आज भी दीदार बाकी है ;
अनकही अहसासों को दबाना ,
तेरे खत की खुसबू को छुपाना ,
बारिशों की बूंदो में आंसू बहाना ,
जमानों की बेवफाई में
आज भी मुलाकात बाकी है ;
हज़ारों दुआ से तुझे माँगा ,
खामोश मूरत से भीख पसारा ,
पत्थरों की इस दिनिया में
आज भी ज़िन्दगी अधूरी है ;
हाथों में मेरा हमसफ़र ,
बाहों में रहूँ तेरे बेखबर ,
दिल के हर कोने में रहूं मायासुर ,
ज़िन्दगी के इस कश्मकश में
आज भी तमन्ना जगी है |
By Sasmita Kumari Pradhan

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