कुछ तो है
By Abhimanyu Bakshi
हम भी सीख लेते छल-कपट थोड़ा,
शायद दुनिया में रहना आ जाता।
सपने हक़ीक़त बनने के काबिल होते,
ख़्वाब ज़ुबान से कहना आ जाता।
दर्द किसी बेचारे का साझा कर लेते,
दिल को भी ग़म सहना आ जाता।
नज़रों को नज़ारा नहीं नज़रिया दे देते,
मुंतज़िर बनकर हमें रहना आ जाता।
सच की राह का इख़्तिताम न होता ख़ुशनुमा ग़र,
हमें आसानी से झूठ कहना आ जाता।
क़बूल लेते कि हम महज़ मिट्टी हैं,
वक़्त की हवा संग बहना आ जाता।
By Abhimanyu Bakshi

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