कुछ कहती हैं
By Poonam
हर रोज़ सुबह निकलती हूँ घर से
कुछ नया खोजने की आस लेकर
सुनती हूँ अनसुने गीत कई
देखती हूँ अनगिनत नज़ारे …
पेड़ों पर पत्ते, खुला आसमाँ
पंछियों का चहचहाना, फूलों का खिलखिलाना
भ्रमरो का गुंजन, उड़ते बादल
खेतों में फसलें
कुछ कहती हैं…
चेहरों पर खामोशी और मायूसी
शोर भरी इस दुनिया में भी
ख़ामोश जुबां कुछ कहती है…
ज़रा गौर करो, सुनकर देखो
झुकी नज़र, आवाज़ दबी
दास्ताँ अनसुनी
बयां करने को आतुर
हर बंद जुबाँ कुछ कहती है…
हर पल भागती सी ए जिंदगी
ज़रा ठहर एक पल को तू भी
देख दुनिया के नज़ारे
हर शख्स की है यही कहानी
कहीं ख़ामोशी, कहीं शोर है
ये शोर और ये ख़ामोशी भी
सुनकर देखो
कुछ कहती हैं…
By Poonam

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