कुछ कमी सी है मुझमें…
By Ishwari Deshpande
कुछ कमी सी है मुझमें
की जब बेदरकार सा होकर दिल खोलकर भी हस लेता हुं,
तब भी उसकी हसी वाली खनक नहीं पाता
ना उमदा तालीम के बाद भी समेट पाता हुं वो लब्ज़
जो उसके बेमतलब तक अल्फाजों-बयानों से ज्यादा सुकून लाते हो
नही जता पाता प्यार हजारों बहार अंदाजो में
जीतने बेइंतहा जज्बात वो सिर्फ छू लेने से जता लेती है
और चाहे कितने ही तडके लगा दूं रोशन लम्हों के
उस जैसा रंगीन खयाली पुलाव तक नहीं सजा पाता
कुछ कमी सी है मुझमें
उसका सांस लेना याद दिलाता है मुझे अपने जिंदा होने की
उसका रोना महसूस कराता है, मेरे सीने में दिल के होने की
उसके होने से मेरी पहचान है शायद
मुझमें उसका ज्यादा, मेरा कम होना काफी आसान है शायद
हैरान हुं खुदा की कारवाइयों से
की ये कैसी खूबसूरत कमी है
जो गोद में इक नन्हीं सी जान के आने के साथ आती है
की ये कैसी कमी है
जोमेराहोना, नाहोना, सबमुक्कमलकरजातीहै
By Ishwari Deshpande

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