कुछ ऐसा करें कि रात लजाए|
By Surya Kant Pawar
कुछ ऐसा करें कि रात लजाए,
तेरे सिरहाने रख कर अपने ख्वाब सजाएं।
तेरी धड़कनें चुन लें अपनी साँसों से,
होठों की थपकियाँ देकर तुझे सुलाएं,
कुछ ऐसा करें की रात लजाए।
तेरे तिल गिन लें अपनी आहों से,
तेरे पीठ पर पूनम का चाँद उगाएं,
सधे कुम्भ सा यौवन तेरा,
तेरी धीमी आंच में हम घुल जाएं|
कुछ ऐसा करें की रात लजाए।
ये काम कमान प्राणिक चंचल,
इनसे छुपकर कजरा चुराएं।
तेरी ज़ुल्फ़ ओढ़ लें हम,
और बोसों से सुधा चुराएं।
कुछ ऐसा करें की रात लजाये।
ये धवल मृत्तिका उरोज सु-गढ़,
इनका मधुरस हम पी जाएँ।
तुझे बाहों में रख लें हम,
और तेरी खुशबू में खो जाएं।
कुछ ऐसा करें की रात लजाए।
By Surya Kant Pawar

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