किस्मत-ऐ -दास्तान
By Menka Gupta
मैंने पूछा उनसे , किस्मत किसे कहते हैं ?
उन्होंने कहा, किस्मत वहाँ जहाँ खुदा रहते हैं
सड़क पर बैठे एक बच्चे ने कहा ,
किस्मत से तुम वहाँ और मैं यहाँ
जब पूछा बुज़ुर्गों से तो पता लगा,
किस्मत से मिलता है हमें कोई अपना सगा
दोस्तों ने कुछ इस कदर किया बयां,
किस्मत से ही बनती है दोस्ती की दास्ताँ
माँ ने भी एक राज़ बताया,
चेहरे की मुस्कान का कारण
किस्मत का एक रूप समझाया
फ़िर टकराया एक इंसान मुझसे,
चल न सकता था , हुई वार्तालाप जब उससे
ख़ुशी को फिर भी उसने खुदा की एक रेहमत बताया
तब जाकर खुश किस्मत होने का मतलब समझ आया
दुनिआ के सारे सुख लेकर भी हम ,
किस्मत को कोसते रहते हैं
खुदा की रेहमत उन पर बनी रहे
जो हमें किस्मत वाला कहते हैं
By Menka Gupta

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