किस्मत
By Jaideep Muthiyan
रास आ जाए तो लिखी हुई थी अपनी
जल जाए तो शायद नहीं थी मिलनी
चाहत तो हर किसी की दिल्लगी
खो जाए तो समझना थी वही उसकी मर्ज़ी
जमकर कोशिशे तो लगी रहती है अपनी
पसीने की कीमत मालूम नहीं कितनी
आस तो बांधकर कुछ ऐसी है रक्खी
ज़मीन पर होकर भी.... आस्मानी
सासें तो रही ऐसे ही चलती
जब लगा था कि.... अब रुकी, बस अब थमी
कुछ किस्मत कुछ करनी
By Jaideep Muthiyan

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