किलचियां!
By Sabiha Mohammed (Shadan)
कभी फुर्सत से तुम्हें बताएंगे...
पास बैठा कर सुनाएंगे...
टूटा है हर बार दिल हमारा ।
टूटे ख्वाब की किलचियां, तुम्हे दिखाएंगे ।।
यूं ना मारा करो हमें तंज़, संजीदगी का...
हम तो मुस्कुरा कर, सह जाएंगे...
दर्द का एहसास, नहीं ना तुम्हें?
आओ! कुछ किलचियां, तुम्हें भी चुभाऐंगे ।
हौले हौले निकालना तुम हर टुकड़ा एहतियात से ।
हौले हौले हम भी संभल जाएंगे ।
यूं तो दर्द नही ज़ख्मों में अब!
लेकिन! तुम्हारे ऊंस को, मलहम सा लगाएंगे ।
कभी बैठो फुर्सत से पास हमारे ।
तुम्हें मोहब्बत से, मोहब्बत सिखाएंगे।
By Sabiha Mohammed (Shadan)

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