किधर जाएंगे
By Manish Upreti
हम हालातों से मारे हुए
हालातों से किधर जाएंगे
इश्क़ को बाज़ार में बिकता देख
इक दिन मेरे ख्याल मर जायेंगे
बदन पर मर मिटने वाले
इक दिन न जाने किस घर जाएँगे
दर्द पर दर्द का मरहम लगाकर
इक दिन सारे घाव भर जाएंगे
तुम्हें बाहों में लेकर बहलाते रहे जो
देखना इक दिन जिम्मेदारियों से डर जाएंगे

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