कितने ही अंधेरों के तूफान रख लो, मै जुगनू सा चमकता सितारा हूं।
By Bhagawan Bose
कितने ही अंधेरों के तूफान रख लो, मै जुगनू सा चमकता सितारा हूं। दिन रात लगे रहे जिनकी वफादारी में, आज उनकी नजरों में एक नाकारा हूं। सच को सच कहा, और झूठे को झूठा, इसलिए तो मैं अब बेसहारा हूं। समंदर में कब तक तैरते रहोगे जनाब, आ जाओ मैं एक किनारा हूं। वक्त अभी भी गया नही है, एक मौका तो दो, मस्ती का खुबसुरत नजारा हूं। हजारों लोग मिलेंगे तुम्हे राह में, मगर तेरे सफर का मैं ही तो एक सहारा हूं। एक बार साथ देकर तो देखो, मैं इन्सान बहुत ही सच्चा और प्यारा हूं। वक्त मिले तो अपने नगमों को ले आना, मैं एक उर्दू मुशायरा हूं। किसी के इज्जत की परवरिश क्या कर ली, उन्होंने समझ लिया, बेचारा हूं। जीत तो ना सका सब कुछ, मगर ना तो कभी हारा था और ना ही अभी हारा हूं।
By Bhagawan Bose

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