कामयाबी का नशा
Updated: Jul 16, 2025
By Tarif Mustafa Khan
जब बुलंदी आकर क़दमों को चूम लेती है,
भाग न पाने वाली घोड़ी भी दौड़ जीत लेती है।
झुक कर करते हैं सभी घोड़े-गधे एहतेराम,
कामयाबी के नशे में वो भी झूम लेती है।
उसके हुनर हो या ऐब, सब सराहे जाते है,
वो खुदा है इन बातों का ये मफ़हूम लेती है।
दुनिया उसे अपनी सर आंखों पर बिठा लेती हैं,
वो दुनिया को अपने कदमों तले रौंद देती है।
बगैर मेहनत मिली कामयाबी उससे सम्हाली नही जाती,
छलांग ऐसी वो लगाती है कि अपनी टांगें तोड़ लेती है।
By Tarif Mustafa Khan

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