कहानी
By Yashaswi Agrima
शिद्दत तो इस स्याही कि है
अल्फाज़ो में वो ताकत कहा थी,
बातें चाँद की हुई है
सितारों में वो नजाकत कहा थी।
दस्तूर तो उन नवाज़िशों का था
उनकी हाँ में भी वो इंकार छुपी थी,
कोसते रहे उन्हें गवाने पे खुद को
मगर गलती कभी हमारी तो ना थी।
मसरूफ थे उनके इश्क़ में
सिर्फ इनायतें ही भेजी थी,
खफा आज भी नही है ये दिल
क्योंकि वो कहानियां कभी हमारी न थी ।
By Yashaswi Agrima

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