कहां हो तुम?
Updated: Dec 6, 2022
By Deepali Bhatia
कहाँ हो तुम?
ये तुम तो नही!
देखती हूँ तुम्हे
तो बड़े होने से,
डर लगता है मुझे!
प्रेम किया था मैंने,
तुम्हारे अल्हड़पन से,
तुम्हारी जिंदादिली से,
तुम्हारी ज़िद से,
पर अब डर लगता है..
डर लगता है मुझे
तुम्हारी परिपक्वता से!
कहाँ हो तुम?
ये तुम तो नही!
देखती हूँ तुम्हे
तो बड़े होने से,
डर लगता है मुझे!
प्रेम किया था मैंने,
तुम्हारी मोहक मुस्कान से,
तुम्हारे आँसुओ की ज़ुबान से,
तुम्हारी मस्तमग्न अदाओं से!
पर अब डर लगता है मुझे
तुम्हारी मौन आँखों से!
कहाँ हो तुम?
ये तुम तो नही!
ढूँढ़ रही हूँ तुम्हे,
क्या मिलने दोगे मुझे,
उस बचपन से
जिसके मुंह पर
किवाड़ लगा आए हो!
By Deepali Bhatia

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