कहां है
By Teri Kalam
उंचे बंद डिब्बो में बैठा
कोई कुछ ढूंड रहा है,
खुलकर साँस लेलूं जहां मैं
ऐसी वो हवा कहां है ।
बचपन में बुने थे जो
वो मेरे सपने वहां है,
चहचहाहट के बीच में मिलकर
खिलते सब फूल जहां है ।
माँ की गोद से आती
वो सर्दी की धूप कहां है,
यारो के पीछे भागे
वो नटखट सा रूप कहां है ।
जहां पंछी संग करी दोस्ती
वो भरे भरे से बाग कहां है,
रविवार की खुशी में लगते
वो कपड़ो पे दाग कहां है ।
अब कभी कभी खिड़की से देखूँ
तो कही कही वो क्षण मिलता है,
ढूँड ढूँड कर इस दुनिया में
वो पुराना सा कण मिलता है ।
आगे आगे में चलूं अब
पीछे पीछे मन चलता है,
भरी भरी सी इस दुनिया में
खाली खाली सा तन चलता है ।
By Teri Kalam

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