कसमें
By Kuldeep Rai
कसमें
कीमती कसमें कहा दर लाई।
एक मुट्ठी राग की।
सब सपने घेर लाई।
कीमती कसमें कहा दर लाई।
ना जिंदगी की मोल चुकाई।
ना रिश्तों की लाज।
कीमती कसमें कहा दर लाई।
पग पग में कीमत की एहसास दिलाई।
की भूल गए को सौदा खुशी के लिए था।
कीमती कसमें कहा दर लाई। वाहा न मरभूमी न कोई कब्रस्थान। बस साशो का जुगार । कीमती कसमें कहा दर लाई। मंजिल ऐसी की मिलावट भी ना जानी। कीमती कसमें कहा दर लाई। कुलदीप किरात
By Kuldeep Rai

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