कविता
By Mohan Jha
उर अन्तर्वाणी व्यथा कथा चिंतन कविता।
जनमानस क्रन्दन स्पन्दन जीवन कविता।।
ममता जननी जीवन कविता;
चंचलता बालसुलभ कविता;
नवनीत मीत प्रति प्रणय गीत
स्पर्श सुखद कोमल कविता।
कलरव खग मधुकर गुञ्जन मनरञ्जन कविता।
रस ताल छन्द गति उत्प्लावित सरिता कविता।१।
आगम स्वर विधि सर्जन कविता;
मुरली सुर ताण्डव लय कविता;
वैषम्य सहित विष अमिय तदपि,
जीवन सातत्य परम कविता।
साहित्य अलंकृत युक्त भाव आलेख सुलेख गुणी कविता।
नीरसभाषाव्याकरणहीनमोहनअर्पितकविताकविता।२
By Mohan Jha

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