कविता
Updated: Dec 3, 2022
By Neha Mishra
मजहब का मुझे मोह कहाँ
कुछ भी अता करना
जुबां-ए-इश्क आऐ तो
मुझे उर्दू बना देना ।।
ये ज़मीं डोल जाए तो
कयामत-ए-रात आऐ तो
बक्स देना हुस्न-ए-तख्त उनको
मुझे जुगनु बना देना ।।
कोई चाँद टूटे तो
कोई जलजला आऐ तो
उन्हें आबाद कर देना
मुझे साहिल बना देना ।।
By Neha Mishra

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