कलाकार
By Swati Sharma Singh
कला को तुम चुनते नहीं
वो खुद तुम्हे चुन लेती है
मिलती है ये ऐसे जैसे कोई उपहार है
और इसको पाने वाला हो जो
वो कलाकार है
कला के है रूप कईं
लेखक वक्ता कोई तो कोई संगीतकार है
कला अलग अलग पर एक सी पहचान है
वो कलाकार है
न मिलती है बाजार मे
न कही से डाउनलोड की जाती है
ये कब किस के घर आएगी
ये बस कुदरत बताती है
बिना किसी भेद के , ये जिसको चाहे अपना ले
कला को जो, और जिसको कला स्वीकार है
वो कलाकार है
आगे इसके राजा महाराजा भी सर झुकाते हैं
गैरों को अपना बनाने का जादू है उसमे
जो अपनी कला मे हो माहिर
दिलो को जीतने का वो अचूक हथियार है
वो कलाकार है
कभी गुदगुदा दे
कभी रुला दे
कभी जोश सा रगो मे दौड़ा दे
आराम का कम्बल कभी
तो कभी क्रांति की तलवार है
वो कलाकार है
कला की दुनिया मे जो आया
उसको नहीं फिर कुछ और भाया
चढ़ता है तो चढ़ता चला जाता है
न उतरने वाला बुखार है
अभ्यास की आग मे तप कर
होता जो सोना तैयार है
वो कलाकार है
By Swati Sharma Singh

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