कलयुग
By Sanat Raj
ज्ञात सभी को ये आवश्य होगा,
नहीं किसी के लिए ये रहस्य होगा,
जिस युग में रहते ये कली का,
पाप से नही कोई बली का,
रहता असुर सभी के अंदर,
पाप का घड़ा हो चुका समंदर,
लालच और अहंकार का अब तांडव,
युद्ध में हार रहे अब पांडव,
प्रकोप पाप का हो रहा प्रचंड,
भला होने पर भी मिलता दंड,
सभी के मन में अब विनाश है,
मन में अब पाप का वास है,
आस लगाए बैठे ईश्वर के दासी,
कब आयेंगे प्रभु बन पाप के सर्वनाशी,
नारायण जब कल्कि अवतार में आयेंगे,
कली के कलयुग का नाश कर जायेंगे,
तब फिर वो सतयुग का सवेरा होगा,
दूर सभी के मन से पाप का अंधेरा होगा,
पर तब तक बाकी पाप का ये कहर है,
क्योंकि कली के कलयुग का ये पहर है।
By Sanat Raj

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