( कलम बनाम बन्दूक )
By Aakash Deep
कवियों के हाथ में जब
कलम की जगह होंगी बन्दूकें,
तब क्या प्रेम करने वाले भी
नज़र आएंगे उन्हें क़ातिल ?
और जो क़ातिल होंगे क़सूरवार,
क्या उन्हें
क्षमा कर
दिया जाएगा,
प्रेमी मान कर,
जैसे
जायज़ मान लिया जाता हैं
प्रेम और जंग में
सबकुछ ||
By Aakash Deep

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