कभी दुआ देता
By Harjinder Singh
काश मैं तुझको कभी भुला देता
कोई ऐसी भी मुझको कभी दुआ देता
जम जाते पैर वहीं और वक्त वहीं रुक जाता
तु मुड़कर बस एक जो बार मुझ को सदा देता
जो जायदाद थी मेरी बस तुम ही थी
इससे बढ़कर क्या मुझको खुदा देता
महसूस होती है मुझको इनमें रुह तेरी
वरना इन चिट्ठियों को मैं कब का जला देता
काश मैं तुझको कभी भुला देता
कोई ऐसी भी मुझको कभी दुआ देता।
By Harjinder Singh

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