कभी कभी
Updated: Dec 5, 2022
By Prashant Lodaya
कभी कभी कुछ खो देना अच्छा होता है|
दीवारें मकान को मजबूत बनाती हैं रिश्तों को नहीं,
थोड़ी सी मजबूती खोकर दीवारों में खिड़कियां बना दो,
मकान और रिश्ते दोनों को ताजगी मिल जाएगी|
औरों से प्यार हर कोई करता है पर खुद से क्यों नहीं,
दुनिया की परवाह खोकर थोड़ी सी खुद को तवज्जो दो,
खुशनुमा जिंदगी और भी हसीं हो जाएगी|
बड़ी बड़ी अलमारियां, ढेरों उपलब्धियां हों तो कोई हर्ज नहीं,
कुछ उपलब्धियां खोकर फुर्सत के लम्हों से भरी एक अलमारी बना दो,
हर जीत और बड़ी, हर हार और छोटी नजर आएगी|
फलक तक जाना, सितारे तोड़ लाना कोई जरूरी नहीं,
पाने की चाहत खोकर इश्क़ को मुकम्मल बना दो,
मेहबूब की आँखें आईने की मानिन्द पेश आएंगी|
कभी कभी कुछ खो देना भी अच्छा होता है|
By Prashant Lodaya

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