कठपुतली
By Puja Agarwal
क्यों ऐसा होता है कि एक की गलती की सजा सबको मिलती है
क्यों ऐसा होता है कि एक ही गलती सारी अच्छाई को भुला देती है,
कभी-कभी आजादी भी एक बंदिश सी लगती है
कुछ चीजों में भारी मात्रा में छूट
तो कुछ चीजें बहुत महंगी पड़ती है।
कसूर कुछ ना था मेरा
बस इतना ही कि मैं एक इंसान हूं,
सब ने कहा दिल की सुनो
जब सुनने लगी तो कहा बेकार हूं
काश एक कठपुतली ही होती, इंसान नहीं
बंदिशों में रहती पर परेशान नहीं,
मर्जी दूसरों की होती और खुशियां भी
पर बेफिक्र होती मैं, उदास नहीं।
By Puja Agarwal

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