कौन है
By Mehul Makwana
कुछ तो बात होती है दोस्ती की रिश्ते में,
वरना पराये लोगों में अपना होता कौन है?
मजबूर करती है हमे ये कह कर,
ऐसे अकेले में मुँह छुपाए यहाँ रोता कौन है?
कुछ रिश्ता है शायद नींदों और ख़्वाबों में,
सपना टूटने के बाद जहाँ में सोता कौन है?
मजबूरी कहोगे या कहोगे बेवफ़ाई उनकी,
मिले हुए ईश्क़ को ऐसे खोता कौन है?
ये रीत है इस कम्बख़्त दुनिया की ज़ालिम,
जो कहते है, दिल टूटने पर ऐसे हस्ता कौन है?
पता है उसे या शायद अन्जान है वो इस बात से,
की आँखों में उसकी ख़्वाब पिरोता कौन है?
कुछ चीज़ें होंठों से नहीं, नज़रों से बयाँ होती है,
क्योंकि महोब्बत की ज़रूरत के बारे में कहता कौन है?
चुप रहना आदत नहीं, ज़रूरत है ये हालात की,
वरना ज़लील हो कर भी इतना सेहता कौन है?
हमारी और दुनिया की न सही, अपने दिल की तो सुन लो,
कह दो, आख़िर इस दिल में हमारे सिवा और रहता कौन है???
By Mehul Makwana

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