कौन जाने किस और मुकाम मेरा
By Raj
कौन जाने किस और मुकाम मेरा,
क्या ही रास आयेगा तुम्हे दुआ सलाम मेरा,
ये कल तश्तरी मे परोसे अधुरे ख्वाब तुम्हारे,
पहले से जर्द है यहा ख्वाबदान मेरा,
एक खिडकी के दो छोर पर हम तुम है,
तुझे साये मे तराशना शाया निशान मेरा,
सर्द उस रात मे सब जाहीर हो सा गया,
कुछ खास ए दिल तुम्हारा कुछ आम मेरा,
ये जिस्म की गर्मी ये मेहताबी रात जो है,
ये फैलते बादल तुम्हारे ये सिकुडता चांद मेरा,
और कुछ बाते जो सीतारा ए मौसिकी है,
सीतारा जहाँ तेरा और सारा असमान मेरा,
By Raj

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