और तुम…
By Tejash Burad
कहा है की…
खुला आसमाँ, तन्हाई के बादल और ये सर्द रातें,
बेशर्म मौसम था या यादें तुम्हारी ये कह नहीं सकते…
वही चाँद, वही सितारे और तुझसे जुड़ी तेरी बातें,
नर्म समय था या नियत तुम्हारी ये कह नहीं सकते…
तेरा ज़िक्र, सिर्फ़ तेरी चिंता और तेरा ही ख़याल,
झूठी तुम थी या प्यार तुम्हारा ये कह नहीं सकते…
तेरे संग बीते दिन, बीती शामें और हर गुज़री रातें,
बेवफ़ा तुम थी या साथ तुम्हारा ये कह नहीं सकते…
तेरी ख़ुशी, तेरी चेहरे पे वो हसी, मेरे संग वो ख़ुशनुमा पल,
बेईमान तुम थी या आँखें तुम्हारी ये कह नहीं सकते…
तेरे ख़त, मेरे तोहफ़े और हमारी अनगिनत तस्वीरें,
नक़ाब में तुम थी या चरित्र तुम्हारा ये कह नहीं सकते…
By Tejash Burad

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