और अमलतास सूख गया
By Vandna Sonu
अमलतास के फ़ूल,तुम और मैं
कभी साथ थे ।
मैं ख़ुश थी,
तुम बेहद ख़ुश थे........
अमलतास मुस्कुरा रहा था
बहुत पीछे खड़ा रह गया अमलतास
तुम बहुत आगे बढ़ गए...
और मैं?
मैं तुम दोनो के पीछे———-
दौड़ती जारही हूँ ..
बेसुध,बेचैन
पगली सी
ढूँढ रही हूँ वो ही दिन मैं
बनकर के दीवानी
अमलतास के नीचे खड़े,फूल चुनती रही..
राह तकती रही
अब आवाज़ दोगे,कुछ कहोगे,मैं बाँहें फैलाए खड़ी रही ।
अमलतास सूख गए
मैं मुरझा गई
तुम न आए
By Vandna Sonu

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