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ओह मेरे सावन नोठ कोठ !!

Apr 27, 2023
2 min read

By Jitendra Saini


ओह मेरे सावन नोठ कोठ !!

इन कठ भट मज बट


वाह ! रे सावन इतना मनभावन नोट , बट सठ

चऊं ओर हरियाली ये बारीश निराली कोट ,

पड़ी थी जो सूखी वो ज़मीं हो गई मतवाली भोट , भमेट एज



चिरई कोयल की गूंज ज्यों ही निकलती , सठ‌ सावेथ यथ याम्यभीदब

भेदकर सीना पहले फिर कर्णों तक है बज पहुंचती , सठ साठ सीयध्वा याघ मजाभ

अब तो खेत - खेत में मोर बोलै रै , बाज याघ

हूं बैठा छत पे मन चंचल पर वहीं डोलै रै , खाग याध नाद कीयध्व ष‌ बाघ आझ , भट माठ


अब की बार तो पेड़ में हमारे नोट बट सठ एज जामून भी खूब आई बट एध , भट सठ‌ यावेत्य याघमीझब

हो जाएं नोठ दांत - मूंह खट्टे भट भी पट सट पर मनज जो अनज भरकर खाई पेट , सट ईहट

तेरी छटा अनन्त और कई प्रकार की भी है , अज

पर ठहरा मैं भी तेरा दीवाना रखूं मन‌ में विचार भी है नोट यगसन माघ्य बीज भतैव भ भाग , कई भी नोट भज एज भावत्य स बाघ यद

झूम उठा मन कि नाचूं थिरकूं गाऊं सन , एज नोठ यमेत

कभी ना हो खत्म वो लेख लिखता जाऊं मन , मौज नोट बैज जामे भजन कैझ

तेरा पूरा वर्णन कर दूं मैं तुझमें ही यूं जी लूं मगर , भट बावेज एज

अब के तो फुर्सत सी में सारा जूस नोठ पी जाऊं मगर तेरा भोठ , भैत्सग भै घर गावेत न घर कम मघर यज अघर एज अगर बट नगर


गिरुं बूंद बनकर ज़मीं पर गाऊं साथ कोयल की नकल कर करै , किए कज भट मगर दान धब

चुग्गा - भुग्गा देने के बहाने पंक्षी को बना लूं हमसफ़र भैज भरै , भावअज्य याघ भज एज

भर जाऊं मगर उड़ान तब , विस्तार देखने तेरा मोर यज पर सवारी कर , एज भगत भाग भज बीघ मज आघ


भर लूं दिमाग को तुझ से और लगा दूं तुझमें ही मैं अपना मन भोट , इजकमेध्य यावदगद नाझ जीहतयामन नीथनथेव


तू यूं ही हर वर्ष आ जाना ओह मेरे सावन ओह मेरे सावन नोट , ययत्वयाघ सम बाज एज समेद दीघजाजेभ



By Jitendra Saini



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