ऐसी हैं वो
By Bhavesh Agarwal
मुस्कान से है पहचान
उन्हें ठहाकों से जानते हैं
आंखें बेचैन हैं उनकी
चहरा मासूम मौन है
अदायें जुदा है ज़रूर
पर मिलने की खूबी है
अक्सर बात प्यार से करतीं हैं
या चुप रह जाती हैं अक्सर
यकसर रहना पसंद है
दोस्त नहीं, साथी सीमित
बस दो बातें हमसे अक्सर
अक्सर गुम हैं ख्यालों में
By Bhavesh Agarwal

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