ऐ माँ
Updated: Jul 30, 2025
By Vinita Verma
ऐ माँ तेरा क़र्ज़ कैसे उतारेंगे हम
दिया है तुने हमें दिया है जन्म
ना भूलेंगे हम तेरा वो जागना
हमारे लिए रात दिन भागना
ख़ुद सुलगती रही तू जीवन की आग में
हमें करती रही शीतल आँचल की छाव में
वो तेरा गुनगुनाना जीवन का गीत
बनाकर अपने गमों को अपना मनमीत
ना समझा कोई तेरा ग़म तेरे घाव
कैसे चलती रही तू काटो भरे पथ पर नंगे पाव
हम थे नासमझ काश समझ पाते वो सब
ज़िंदगी गुज़र गई अब तो शाम हो गई पता नहीं कब
By Vinita Verma

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