ऐ ज़िंदगी
Updated: Dec 5, 2022
By Dixit Tarun Shah
ऐ ज़िंदगी ! चल तुझे कुछ बातें बताता हूँ !
मन के किनारे बैठते हैं,
चल तुझे लहरों की आवाज़ सुनाता हूँ।
कितनी खामोशी है इस कशती में,
पर रुख बहुत है इस ज़िंदगी में।
ऐ ज़िंदगी ! चल तुझे कुछ बातें बताता हूँ !
तैरने का शौक रखता हूं,
पर ये समंदर है, यही सोच कर सहम जाता हूं।
शिकवे कई है अपनो से,
पर वो अपने हैं, यही सोच कर सहम जाता हूं।
ऐ ज़िंदगी ! चल तुझे कुछ बातें बताता हूँ !
कभी आसमान से बरसता हूं,
कभी आँखों से बरसता हूं।
समंदर में घुलकर लहरे बनाता हूं,
कश्ती में सवार हूं, अब नहीं रुक सकता हूं।
ऐ ज़िंदगी ! चल तुझे कुछ बातें बताता हूँ !
अंधेरो से डरता हूं,
पर बिजली की रोशनी भी नहीं चाहता हूं।
बीच समंदर में गोते खा रहा हूं,
बस सुकून का आशना चाहता हूं।
ऐ ज़िंदगी ! चल तुझे कुछ बातें बताता हूँ !
By Dixit Tarun Shah

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