ऐ खुदा
By Nimisha Yadav
ख़ुदा से कुछ शिकायत है मुझे
ख़ुदा ने कहा उसे याद कर,
तेरा भला होगा।
दर - बदर फिर मैं भटका,
माथा टेका, घंटी बजाई,
मोम जला कर चादर चढ़ाई।
खुद के लिए दुआ मांगी, क़ुबूल नहीं हुई
खैर यह तो फिर भी मुनासिब है,
पर जब दूसरों के लिए दुआ मांगी,
तब तो क़ुबूल कर लेता तू, ऐ ख़ुदा।
आयत पढ़ने की भी कोई सज़ा देता है क्या?
क्या तेरे दर पर आना छोड़ दूं?
क्या तुझे याद करना छोड़ दूं?
मुस्कुराने की वजह तो मिलती नहीं,
कम से कम दर्द के ज़रिए तो मत बढ़ा।
आज ख़ुदा से कुछ शिकायत है मुझे।
By Nimisha Yadav

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